उक्त तीनों नाड़ियों - इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना का मिलन-स्थल ब्रह्मरन्ध्र का मुख होता है। अर्थात् ये तीन नाड़ियाँ त्रिवेणी संगम के समान होती हैं। इस संगम में स्नान करने वाले ज्ञानीजन निश्चय ही उत्तम मुक्ति पाने के पदाधिकारी होते हैं।
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