यदि दाएँ हाथ के अँगूठे को मुख में प्रविष्ट कराकर पूरा मुख पूरी तरह से बन्द कर लिया जाय तो शरीर में संचरित होने वाला वायु स्थिरत्व पा लेता है। इस वायुरोधी प्रक्रिया के द्वारा निश्चय ही वायु का स्थिरीकरण होता है।
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