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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 155
सुषुम्णायां स्थिता नाडी चित्रा स्यान्मम वल्लभे । तस्यां मम मते कार्या ब्रह्मरन्ध्रादिकल्पना ।।
सुषुम्ना के आन्तरिक भाग में स्थित रहने वाली इस नाड़ी को चित्रा नाड़ी कहा जाता है। हे पार्वति! इसी चित्रा नाड़ी से ही ब्रह्मरन्ध्र की कल्पना की गयी है, ऐसा मेरा अभिमत है।
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