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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 153
तस्य मध्ये सुषुम्णाया मूलं सविवरं स्थितम् । ब्रह्मरन्ध्र तदेवोक्तमामूलाधारपङ्कजम् ।।
उस योनि के बीच वाले रन्ध्र में सुषुम्ना नाड़ी की अवस्थिति रहा करती है। उस रन्ध्र को ही ब्रह्मरन्ध्र का नाम दिया गया है तथा मूलाधार पद्म भी कहा जाता है।
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