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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 152
तालुस्थाने च यत्पद्यं सहस्त्रारं पुरोदितम् । तत्कन्दे योनिरेकास्ति पश्चिमाभिमुखी मता ।।
तालुस्थान में स्थित रहने वाले सहस्रार के कमल-कन्द में एक योनि उसके पृष्ठभाग में अर्थात् पीछे की ओर मुखवाली होकर रहती है।
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