मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 151
तालुमूले सुषुम्णास्य अधोवक्त्रा प्रवर्तते । मूलाधारेण योन्यन्ताः सर्वनाड्यः समाश्रिताः । तां बीजभूतास्तत्त्वस्य ब्रह्ममार्गप्रदायिकाः ।।
उसका मुख नीचे की ओर तालुमूल में वर्तमान रहता है। मूलाधार से योनिस्थान तक अन्य जितनी भी नाड़ियाँ हैं वे सभी इस तत्त्वबोध की बीजरूपिणी तथा ब्रह्मपंथ-प्रदायिनी सुषुम्ना नाड़ी के आश्रयभूत रहती हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें