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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 150
अत ऊर्ध्व तालुमूले सहस्त्रारं सरोरुहम् । अस्ति यत्र सुषुम्णाया मूलं सविवरं स्थितम् ।।
इसी आज्ञाचक्र के ऊपर तालुमूल में सहस्त्रदलीय कमल की अवस्थिति रहती है। वहीं पर ब्रह्मरन्ध्र के विवर मूल में सुषुम्ना नाड़ी की भी स्थिति होती है।
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