इसी आज्ञाचक्र के ऊपर तालुमूल में सहस्त्रदलीय कमल की अवस्थिति रहती है। वहीं पर ब्रह्मरन्ध्र के विवर मूल में सुषुम्ना नाड़ी की भी स्थिति होती है।
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