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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 15
चतुर्धा साधको ज्ञेयो मृदुमध्याधिमात्रकः । अधिमात्रतमः श्रेष्ठो भवाब्धौ लंघनक्षमः ।।
उक्त चार प्रकार के योग सिद्धयर्थ चार प्रकार के साधक भी होते हैं, जैसे (१) मृदुसाधक, (२) मध्यम साधक, (३) अधिमात्र साधक तथा (४) अधिमात्रतम साधक। इन चतुर्विध साधकों में अधिमात्रतम साधक सर्वोत्तम माना जाता है, क्योंकि वह संसार-सागर पार करने में शीघ्र ही समर्थ बन जाता है।
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