द्विदलध्यानमाहात्म्यं कथितुं नैव शक्यते ।
ब्रह्मादिदेवताश्चैव किञ्चिन्मत्तो वदन्ति ते ।।
हे देवि! इस दो पंखुड़ी वाले कमल के माहात्म्य का वर्णन करने में कोई भी प्राणी सक्षम नहीं हो सकता। इसके माहात्म्य का अल्प मात्रा में ज्ञान रखने वाले ब्रह्मादि देवगण भी मेरे ही द्वारा जान सके हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।