मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 149
द्विदलध्यानमाहात्म्यं कथितुं नैव शक्यते । ब्रह्मादिदेवताश्चैव किञ्चिन्मत्तो वदन्ति ते ।।
हे देवि! इस दो पंखुड़ी वाले कमल के माहात्म्य का वर्णन करने में कोई भी प्राणी सक्षम नहीं हो सकता। इसके माहात्म्य का अल्प मात्रा में ज्ञान रखने वाले ब्रह्मादि देवगण भी मेरे ही द्वारा जान सके हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें