इस आज्ञाचक्र के अधिष्ठाता देव महेश्वर कहे गये हैं। योग-चिन्तक साधकों का कहना है कि इस आज्ञा नामक कमल के ऊपर तीन पीठस्थानों की अवस्थिति है जिन्हें नाद, बिन्दु और शक्ति के नाम से सम्बोधित किया जाता है। ये तीनों ही दोनों भौहों के बीच में स्थित भालपद्म में शोभायमान रहते हैं।
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