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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 138
आज्ञापद्यमिदं प्रोक्तं यत्र देवो महेश्वरः । पीठत्रयं ततश्चोर्ध्वं निरुक्त योगचिन्तकैः । तद्विन्दुनादशक्त्याख्यं भालपद्ये व्यवस्थितम् ।।
इस आज्ञाचक्र के अधिष्ठाता देव महेश्वर कहे गये हैं। योग-चिन्तक साधकों का कहना है कि इस आज्ञा नामक कमल के ऊपर तीन पीठस्थानों की अवस्थिति है जिन्हें नाद, बिन्दु और शक्ति के नाम से सम्बोधित किया जाता है। ये तीनों ही दोनों भौहों के बीच में स्थित भालपद्म में शोभायमान रहते हैं।
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