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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 134
मूलाधारे हि यत् परां चतुष्पत्रं व्यवस्थितम् । तन्त्र कन्देऽस्ति या योनिस्तस्यां सूर्यो व्यवस्थितः ।।
चार पंखुड़ियों वाले मूलाधार कमल कंद में योनि की विद्यमानता रहती है और वही सूर्य का आवास-स्थान है।
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