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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 131
अमृतं वहति द्वारा धारारूपं निरन्तरम् । वामनासापुटं याति गंगेत्युक्ता हि योगिभिः ।।
इड़ा नाड़ी का बहाव वाम नासापुट में होने के फलस्वरूप योगीवृन्द इसे गंगा के नाम से संबोधित करते हैं ।
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