शरीरस्थ आत्मस्वरूप का विचार करते हुए इस बात का निश्चय करना कि रूपवान और कुरुपवान क्या है? यह सम्पूर्ण जगत ही ब्रह्ममय है - ऐसा विचार हृदयगम करना चाहिए। हे पार्वति! ये सभी लक्षण ज्ञानरूप विघ्न में पाये जाते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।