तत्त्ववेत्ता ऋषियों ने अनेक शास्त्रों में अनेक बार वाराणसी क्षेत्र के महत्त्व का निरूपण परमतत्त्व के रूप में किया है। अर्थात् सभी शास्त्रों और ऋषियों ने वाराणसी को परमतत्त्व के रूप में स्वीकार किया है।
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