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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 124
तत्र देवः परन्तेजः सर्वतन्त्रेषु मन्त्रिणः । चिन्तयित्वा परां सिद्धिं लभते नात्र संशयः ।।
इस महान तेजवान् प्रकाश को सदा ही गुप्त रखना आवश्यक होता है। इसके चिंतनमात्र से निश्चय ही परमसिद्धि की उपलब्धि होती है ।
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