मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 123
शरच्चन्द्रनिधं तत्राक्षरबीजं विजृम्भितम् । पुमान् परमहंसोऽयं यज्ज्ञात्वा नावसीदति ।।
उस आज्ञापद्म के बीच में शारदीय चंद्र की आभावाला परम तेजवान् चंद्रबीज अर्थात् 'ठ' बीज की अवस्थिति रहती है। उस बीज का बोध हो जाने पर परमहंस पुरुष में कभी न तो थकावट आती है और न ही किसी प्रकार की क्लेशानुभूति होती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें