उस आज्ञापद्म के बीच में शारदीय चंद्र की आभावाला परम तेजवान् चंद्रबीज अर्थात् 'ठ' बीज की अवस्थिति रहती है। उस बीज का बोध हो जाने पर परमहंस पुरुष में कभी न तो थकावट आती है और न ही किसी प्रकार की क्लेशानुभूति होती है।
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