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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 121
बदा त्यजति तद्ध्‌यानं योगीन्द्रोऽवनिमण्डले । तदा वर्षसहस्त्राणि मन्यते तत्क्षणं कृती ।।
इतना लम्बा समय व्यतीत होने पर भी उसे विगत काल क्षणभर व्यतीत होने-सा जान पड़ता है। अर्थात् समाधि की अवस्था में योगी को काल का बोध नहीं होता।
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