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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 118
इह स्थाने स्थितो योगी यदा क्रोधवशो भवेत् । तदा समस्तं त्रैलोक्यं कम्पते नात्र संशयः ।।
यदि विशुद्ध पद्म में अवस्थित योगी कदाचित् क्रोधित हो उठे तो उसके क्रोधावेश से सम्पूर्ण त्रैलोक्य थर्रा उठता है। यह बात निश्चित रूप से सत्य है।
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