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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 116
कण्ठस्थानस्थितं पद्म विशुद्धं नाम पञ्चमम् । सुहेमाभं स्वरोपेतं षोडशस्वरसंयुतम् । छगलाण्डोऽस्ति सिद्धोऽत्र शाकिनीचाधिदेवता ।।
विशुद्ध नामधारी पंचम पद्म की अवस्थिति कंठप्रदेश में रहती है जिसका रंग सोने के समान सुनहला तथा सोलह स्वरों से युक्त पोडश पंखुड़ियों वाला कहा गया है। इसकी पंखुडियों पर 'अ' अक्षर से लेकर 'अः' तक के सोलह स्वर अर्थात् अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ॠ, ल, लू, ए, ऐ, ओ, औ, अं तथा अः स्वर विभूषित रहते है। इस स्थान में छगलांड नामक सिद्ध तथा अधिष्ठातृ देवी शाकिनी सदैव निवसित रहते हैं।
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