यो ध्यायति परं नित्यं बाणलिङ्ग द्वितीयकम् ।
खेचरी भूचरी सिद्धिर्भवेत्तस्य न संशयः ।।
जो साधक इस परम अविनश्वर द्वितीय वाणलिंग का ध्यान धारण करता है उसे खेचरी और भूचरी मुद्रा की सिद्धि मिल जाया करती है।
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