सिद्धानां दर्शनं चापि योगिनां दर्शनं तथा ।
भवेत् खेचरसिद्धिश्च खेचराणां जयं तथा ।।
ऐसे साधक को सिद्ध पुरुषों तथा योगियों के दर्शन मिलते हैं। खेचरी मुद्रा की सम्पन्नतावश वह आकाशगामी जीवों को भी अपने अधीन बना लेता है।
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