जिस अनाहत नामक पद्म के सिद्ध शिवजी और अधिष्ठातृ देवी काकिनी है उस हत्कमल में जो सर्वदा ध्यानावस्थित रहते हैं उनके निकट देवांगनाएँ भी कामासक्त भाव से आती है।
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