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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 110
पद्मस्थं तत्परं तेजो बाणलिङ्ग प्रकीर्तितम् । यस्य स्मरणमात्रेण दृष्टादृष्टफलं लभेत् ।।
इस कमल के तेजोराशि को बाणलिंग कहा जाता है। इसके स्मरणमात्र से ही साधक लौकिक एवं पारलौकिक सुखों का उपभोग करने में समर्थ हो जाता है।
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