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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 11
नवधातुरसं छिन्धि शुण्ठिकाश्ताडयेत् पुनः । एककालं समाधिः स्याल्लिंगभूतमिदं शृणु ।।
योगाभ्यासी को नवीन रसपूरित पदार्थ शुंठी (सोंठ) चूर्ण के साथ आहार में ग्रहण करने चाहिए। भोजनोपरान्त सोंठ चूर्ण का सेवन करने के फलस्वरूप शीघ्र ही समाधि लग जाती है। अब मैं उसका लक्षण बतला रहा हूँ जिसे तुम ध्यान से सुनो।
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