यह अनाहतसंज्ञक चतुर्थ पद्म हत्प्रदेश में अवस्थित रहा करता है। इसकी बारह पंशुड़ियाँ पर क्रमशः 'क' से 'ठ' तक अर्थात् क, ख, ग, घ, ङ, च, छ, ज, झ, ञ, ट और ठ के अक्षरों से अंकित रहता है। यह कमल परमोज्ज्वल और रक्तवर्णीय होता है। यह प्रसन्नस्थल वायु के बीज का अर्थात् प्राणवायु का आधार स्तम्भ होता है।
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