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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 104
तृतीयं पङ्कजं नाभौ मणिपूरकसंज्ञकम् । दशारण्डादिफान्तार्णं शोभितं हेमवर्णकम् ।।
नाभिस्थल में अवस्थित रहने वाला तीसरा पद्म मणिपूरचक्र के नाम से सम्बोधित किया जाता है। यह कांचन वर्ण के समान चमकीला और दश पंखुड़ियों से युक्त रहता है।
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