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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 10
नाडीसञ्चारविज्ञानं प्रत्याहारनिरोधनम् । कुक्षिसञ्चालनं क्षिप्रं प्रवेश इन्द्रियाध्वना । नाडीकर्माणि कल्याणि भोजनं श्रूयतां मम ।।
नाड़ीचालन-क्रिया की शानोपलब्धि, वायु के प्रत्याहार का निरोध, कुंडलिनी शक्ति के उद्‌बोधनार्थ उदर का संचालन, इन्द्रिय द्वारा सद्यः प्रवेश, नाड़ी परिशोधनार्थ आहार के प्रति आचार-विचार का अनुपालन - ये सभी ज्ञानरूप विघ्न कहे जाते हैं। इसके आगे अब मैं नाड़ी परिशोधनार्थ उस आहार-विधि का वर्णन करता हूँ जिसे तुम सुनो।
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