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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 1
ब्रूहि मे वाक्यमीशान परमार्थधियं प्रति । ये विघ्नाः सन्ति लोकानां वद मे प्रिय शंकर ।।
देवी पार्वती ने शिवजी से कहा - हे ईश्वर, हे परमप्रिय शंकर! योगाभ्यास-काल में उपस्थित होने वाले विघ्नों को आप मुझसे कहिए, क्योंकि योगसाधना के समय साधक के समक्ष अनेक प्रकार की विघ्न-बाधाएँ आकर खड़ी हो जाती हैं। अतः आप अपने भक्तों के कल्याणार्थ उन विघ्नों के निवारण का उपाय कहिए।
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