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शिव संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 99
अयं योगो मया प्रोक्तो भक्तानां स्नेहतः प्रिये । गोपनीयः प्रयत्नेन न देयो बस्व कस्यचित् ।।
देवी पार्वती से शिवजी कहते है कि हे प्रिये! मैंने इस मुद्रा का प्रकटन केवल भक्तों के स्नेहार्य किया है, किन्तु यह अत्यन्त गोपनीय है। इसकी गोपनीयता बनाये रखने के लिए इसे हर किसी से नहीं कहना चाहिए।
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