देवी पार्वती से शिवजी कहते है कि हे प्रिये! मैंने इस मुद्रा का प्रकटन केवल भक्तों के स्नेहार्य किया है, किन्तु यह अत्यन्त गोपनीय है। इसकी गोपनीयता बनाये रखने के लिए इसे हर किसी से नहीं कहना चाहिए।
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