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शिव संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 98
संज्ञाभेदाद्भवेद्भेदः कार्य तुल्यगतिर्यदि । तस्मात्सर्वप्रयत्लेन साध्यते योगिभिः सदा ।।
अमरोली और सहजोली - इन दोनों मुद्राओं का कार्य एक समान ही होता है, फिर भी इनको दो नामों में विभक्त कर दिया गया है। अतः इन दोनों के अभ्यास प्रयत्नपूर्वक करने चाहिए।
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