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शिव संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 97
गतं बिन्दु स्वकं बोगी बन्धयेद्योनिमुद्रया । सहजोलीरियं प्रोक्ता सर्वतन्त्रेषु गोपिता ।।
योगी को वीर्य के चलायमान हो जाने पर योनिमुद्रा की सहायता से उसका अवरोधीकरण करना आवश्यक है। यह सहजोली मुद्रा सभी तन्त्रों में गोपनीय कही गयी है और इसे ही सहजोली मुद्रा के नाम से अभिहित किया जाता है।
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