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शिव संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 95
सहजोल्यमरोली च वज्रोल्या भेदतो भवेत् । येन केन प्रकारेण बिन्दु योगी प्रचारयेत् ।।
क्ज्रोलीमुद्रा के भेदानुसार ही सहजोली और अमरोली मुद्रा का नामकरण किया गया है। सभी बातों का सारांश यही है कि योगी को हर प्रकार से बिन्दुधारण करना आवश्यक है।
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