इस वज्रोली मुद्राभ्यास द्वारा विलासी व्यक्ति अशेष फलभोगों का उपभोग कर निश्चय ही सुखी बन जाता है तथा योगियों द्वारा अभ्यास किये जाने पर उसे निःसंदेह रूप से सम्पूर्ण सिद्धियाँ उपलब्ध हो जाती है। अतः इस मुद्रा का अभ्यास निरन्तर करते रहना चाहिए। इसके द्वारा अशेष अशुभकारी कर्मफलों का भोग भी सुखपूर्वक भुगता जा सकता है।
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