मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिव संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 94
भुक्त्वा भोगानशेषान् वै योगेनानेन निश्चितम् । अनेन सकला सिद्धिर्योगिनां भवति ध्रुवम् । सुखभोगेन महता तस्मादेनं समभ्यसेत् ।।
इस वज्रोली मुद्राभ्यास द्वारा विलासी व्यक्ति अशेष फलभोगों का उपभोग कर निश्चय ही सुखी बन जाता है तथा योगियों द्वारा अभ्यास किये जाने पर उसे निःसंदेह रूप से सम्पूर्ण सिद्धियाँ उपलब्ध हो जाती है। अतः इस मुद्रा का अभ्यास निरन्तर करते रहना चाहिए। इसके द्वारा अशेष अशुभकारी कर्मफलों का भोग भी सुखपूर्वक भुगता जा सकता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें