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शिव संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 92
अयं च शांकरो योगो योगिनामुत्तमोत्तमः ।।
इस प्रकार मूढ़जनों की अज्ञानता का निवारण करने तथा मरणशील मनुष्यों को जरा-मरण के कष्ट से छुड़ाने हेतु यह एक उत्तम साधन का मार्ग है।
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