मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिव संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 90
सिद्धे बिन्दौ महायले किं न सिद्धति भूतले । यस्य प्रसादान्महिमा ममाप्येतादृशो भवेत् ।।
साधक में वीर्यस्खलन की अवरोधक शक्ति आ जाने पर उसके लिए भूमण्डल में कुछ भी दुष्प्राप्य नहीं होता। अर्थात् वीर्यरक्षण में समस्त सिद्धियाँ समाहित रहती हैं। हे देवि! वीर्यरक्षण के फलस्वरूप ही जगत् में मेरी महत्ता स्थापित है। अतः बिन्दुरक्षण करने वाला साधक भी मेरे ही समान गरिमामय हो जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें