छिन्नरूपास्तु ये मन्त्राः कीलिताः स्तम्भिताश्च ये ।
दग्धामन्त्राः शिरोहीना मलिनास्तु तिरस्कृताः ।।
जो मंत्र छिन्न-भिन्नस्वरूप, कीलित, स्तम्भित, दग्ध, मुंडविहीन, मलिन या अनादृत है अथवा
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