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शिव संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 89
जायते प्रियते लोके बिन्दुना नात्र संशयः । एतज्ज्ञात्वा सदा योगी बिन्दुधारणमाचरेत् ।।
प्रत्येक जीवधारी का जन्म-मरण बिन्दु (वीर्य) के ही आश्रित होता है, क्योंकि शरीरोत्पत्ति में वीर्य ही प्रमुख कारण होता है। अतः इसके धारण से जीवन और स्खलन से मरण सुनिश्चित होता है।
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