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शिव संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 83
वाममार्गेऽपि तद्विन्दुं नीत्वा लिंगं निवारयेत् । क्षणमात्रं योनितो यः पुमांश्चालनमाचरेत् ।।
उक्त रीति से वीर्यक्षरण को रोककर उसे ऊपर की ओर खींचे और वाम भाग में स्थिर कर क्षणमात्र के लिए लिंगचालन की क्रिया को रोक दे।
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