शिवजी पार्वती से कहते हैं कि हे देवि! अब मैं अपने भक्तों के हितार्थ सांसारिक अंधकार (अज्ञान) को मिटाने वाली गुह्य से गुह्यतम वज्रोली मुद्रा का कथन कर रहा हूँ।
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