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शिव संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 78
वज्रोलीं कथयिष्यामि संसारध्वान्तनाशिनीम् । स्वभक्तेभ्यः समासेन गुह्याहुह्यतमामपि ।।
शिवजी पार्वती से कहते हैं कि हे देवि! अब मैं अपने भक्तों के हितार्थ सांसारिक अंधकार (अज्ञान) को मिटाने वाली गुह्य से गुह्यतम वज्रोली मुद्रा का कथन कर रहा हूँ।
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