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शिव संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 77
गुरोर्लब्वा प्रयत्नेन साधयेत्तु विचक्षणः । निर्जने सुस्थिते देशे बन्धं परमदुर्लभम् ।।
इसकी प्राप्ति गुरु के अनुग्रह से ही सम्भव होती है। इसकी सिद्धि के निमित्त प्रबुद्ध साधक को शान्तचित्त से किसी एकान्त स्थान में बैठकर साधना करनी चाहिए।
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