मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिव संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 76
अनेन सुतरां सिद्धिर्विग्रहस्य प्रजायते । रोगाणां संक्षयश्चापि योगिनो भवति ध्रुवम् ।।
उक्त बन्ध की प्रभावशालितावश योगी का शरीर स्वयमेव ही सिद्धि की ओर अग्रसर होने लगता है जिसके फलस्वरूप उसकी समस्त व्याधियों का नाश हो जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें