नित्यं यः कुरुते योगी चतुर्वारं दिने दिने ।
तस्य नाभेस्सु शुद्धिः साद्येन सिद्धोभवेन्मरुत् ।।
इस बन्ध का प्रतिदिन चार बार अभ्यास करने वाले साधक के नाभि-प्रदेश का परिशोधन होकर वायु भी परिशोधित हो जाता है।
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