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शिव संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 70
एतद् यः कुरुते नित्यमम्यासं याममात्रतः । मृत्युं जयति योगीशः प्रलयेनापि सीदति ।।
इस प्रकार की मुद्रा को प्रतिदिन एक प्रहार (३ घण्टा) तक करने वाला योगी मृत्यु पर भी विजय पा लेता है और सृष्टि के प्रलयान्त में भी उसे किसी प्रकार का कष्ट नहीं उठाना पड़ता।
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