इस योनिमुद्रा की सिद्धि हो जाने पर सिद्ध पुरुषों के लिए इस घरातल पर कोई भी क्स्तु दुष्षप्य नहीं रह जाती। इस बन्ध के अभ्यास से वायु को सहज ही वश में लाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में यदि साधक पद्मासन लगाकर बैठ जाय तो उसमें आकाश-गमन की शक्ति आ जाती है। वह धरती से ऊपर उठकर नभ-मण्डल में विचरने लगता है।
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