इस बन्ध के लिए कंठप्रदेश की शिराओं को आबद्ध कर हृदय से ठुड्डी को मिला लें तो यह जालंधरबन्ध कहा जाता है। यह देवताओं के लिए भी दुर्लभ होता है।
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