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शिव संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 60
जालन्धरबन्ध बन्द्धा गलशिराजालं हृदये चिबुकं न्यसेत् । बन्धो जालन्धरः प्रोक्तो देवानामपि दुर्लभः ।।
इस बन्ध के लिए कंठप्रदेश की शिराओं को आबद्ध कर हृदय से ठुड्डी को मिला लें तो यह जालंधरबन्ध कहा जाता है। यह देवताओं के लिए भी दुर्लभ होता है।
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