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शिव संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 53
संयोजयेत् प्रयत्नेन सुधाकूपे विचक्षणः । मुद्वैषा खेचरी प्रोक्ता भक्तानामनुरोधतः ।।
अभिप्राय यह है कि जीभ को पलटकर गलघंटिका के पीछे तालु से सटा दें तो यह खेचरी मुद्रा कही जाती है। इसे मैंने भक्तों के हितार्थ ही प्रकाशित किया है।
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