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शिव संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 50
गोपिनीया प्रयत्नेन साधकैः सिद्धिमीप्सुभिः । अन्यथाचन सिद्धिः स्वान्मुद्राणामेष निश्चयः ।।
सिद्धाभिलाषी साधक के लिए उचित है कि वह ऐसे अभ्यास को सदैव गुप्त ही रखे। इस अभ्यास का कथन किसी सामान्य व्यक्ति से करने पर साधक को सिद्धि मिलना सम्भव नहीं होता।
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