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शिव संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 47
महामुद्रामहाबन्धौ निष्फलो वेधवर्जिती । तस्माद्योगी प्रयत्नेन करोति त्रितयं क्रमात् ।।
वेध के अभाव में महामुद्रा और महाबन्ध - ये दोनों ही सफल नहीं हो सकते। अतएव योगाभ्यासी को चेष्टापूर्वक इन तीनों ही साधनों का अभ्यास प्रतिदिन करना चाहिए।
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