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शिव संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 45
यः करोति सदाभ्यासं महावेधं सुगोपितम् । वायुसिद्धिर्भवेत्तस्य जरामरणनाशिनी ।।
जो प्राणी इस श्रेष्ठतम महावेध को गुप्त रखकर निरन्तर अभ्यासशील रहा करता हैं उसे जरा-मरणनाशक वायु की सिद्धि मिल जाती है।
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