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शिव संहिता • अध्याय 4 • श्लोक 39
बन्धयेदूर्ध्वगत्यर्थं प्राणापानेन यः सुधीः । कथितोऽयं महाबन्धः सिद्धिमार्गप्रदायकः ।।
प्राण-अपान को एकीकृत करने हेतु जो प्रबुद्ध साधक इस बन्ध का अभ्यास करता है उसके लिए यह सकलीभूत होता है।
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